भेड़ाघाट में पहाड़ी पर चढ़ने के बाद मंदिर सामने से लंबा नहीं दिखता; वह दर्शक को घेरे में लेता है। राष्ट्रीय स्मारक प्राधिकरण के दस्तावेज में इसकी गोल दीवार का भीतरी व्यास 116 फुट और बाहरी व्यास 131 फुट दर्ज है।
सबसे रोचक गिनती नाम और बनावट के बीच है। परिसर को चौंसठ योगिनी मंदिर कहा जाता है, लेकिन घेरे में 81 छोटी कोठरियां हैं। दस्तावेज के अनुसार इनमें 64 योगिनियों और सात मातृकाओं की प्रतिमाएं थीं; तीन कोठरियां प्रवेश का काम करती हैं। शेष संख्या को नाम से जबरन बराबर मानना इसलिए ठीक नहीं।
गोल दीवार को 84 स्तंभ और भित्ति-स्तंभ संभालते हैं। यूनेस्को की अस्थायी सूची में योगिनी मंदिरों की वृत्ताकार योजना को सामान्य चौकोर या आयताकार मंदिर-रूप से अलग बताया गया है। यहां दर्शक की नजर किसी एक अग्रभाग पर टिकने के बजाय परिधि पर घूमती है।
बीच का गौरीशंकर मंदिर एक और समय-परत जोड़ता है। प्राधिकरण का दस्तावेज इसे लगभग 1155 ईस्वी में रानी अल्हणादेवी से जोड़ता है, जबकि बाहरी योगिनी घेरा पहले का है। तस्वीर में केंद्रीय मंदिर और पीछे मुड़ती कोठरियां साथ दिखती हैं—एक परिसर में अलग दौर और अलग पूजा-विन्यास।
मुख्य बातें
- वृत्ताकार दीवार का बाहरी व्यास लगभग 131 फुट दर्ज है।
- 81 छोटी कोठरियों में से तीन प्रवेश के लिए हैं।
- बीच का गौरीशंकर मंदिर बाद की 12वीं सदी की परत है।
स्रोत और संदर्भ
- राष्ट्रीय स्मारक प्राधिकरण · चौंसठ योगिनी मंदिर, भेड़ाघाट की धरोहर उपविधि ↗प्रकाशन-तिथि उपलब्ध नहीं
- यूनेस्को विश्व धरोहर केंद्र · Yogini Temples — Tentative List ↗26 जुलाई 2024
सार्वजनिक प्राथमिक स्रोतों पर आधारित संपादित लेख। स्रोत जाँच: 16 सितंबर 2026।



