मध्यप्रदेश ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़कर ग्राम डोंगरमंडला की श्रीमती दुर्गेशनंदनी ने अपनी आर्थिक एवं सामाजिक स्थिति में सकारात्मक बदलाव लाने की मिसाल पेश की है। वे वर्ष 2014 से ओम शांति आजीविका स्व-सहायता समूह से जुड़ी हैं। समूह से जुड़ने से पहले आर्थिक संसाधनों के अभाव में परिवार को जीवन-यापन में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था।

समूह से जुड़ने के बाद दुर्गेशनंदनी ने नियमित बचत और समूह से प्राप्त ऋण राशि का उपयोग अपनी आजीविका गतिविधि को बढ़ाने में किया। उन्होंने किराना दुकान का संचालन एवं विस्तार किया। साथ ही अपने पति को गल्ला व्यवसाय प्रारंभ करने के लिए प्रेरित किया। पति के व्यवसाय के लिए घुघरी में दो दुकानें किराये पर लेकर परिवार ने आय के अतिरिक्त स्त्रोत विकसित किए। वर्तमान में किराना दुकान से उनकी व्यक्तिगत आय लगभग 10 हजार रुपये प्रतिमाह है।

आजीविका के साधनों में वृद्धि से परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है। इसका सकारात्मक प्रभाव बच्चों की शिक्षा और परिवार के सामाजिक सम्मान पर भी पड़ा है। दुर्गेशनंदनी बताती हैं कि स्व-सहायता समूह से जुड़ने के बाद उनमें आत्मविश्वास बढ़ा और उन्हें गांव से बाहर जाकर नई जगहों को देखने तथा नई जानकारियाँ प्राप्त करने के अवसर मिले।

दुर्गेशनंदनी की कहानी ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में स्व-सहायता समूहों की भूमिका को रेखांकित करती है। बचत, समूह ऋण और आजीविका गतिविधियों के माध्यम से उन्होंने न केवल अपनी आय का साधन मजबूत किया, बल्कि परिवार के जीवन स्तर में भी सकारात्मक बदलाव लाया है।