मोटे अनाज की विलुप्त हो रही प्रजातियों के संरक्षण और संवर्धन के लिए जिले के जबलपुर विकासखंड के ग्राम समनापुर में स्थानीय किसानों द्वारा दस वर्ष पहले की गई सामुदायिक बीज बैंक स्थापित करने की पहल अब अपने उद्देश्य को पाने में सफल होती दिख रही है। दस वर्ष पूर्व आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र के किसानों के एक छोटे समूह द्वारा स्थापित इस बीज बैंक से कई गांव के किसान जुड़ने लगे हैं।

बरगी के समीप स्थित ग्राम समनापुर में सामुदायिक बीज बैंक की स्थापना कोदो-कुटकी और मोटे अनाज की विलुप्त हो रही स्थानीय प्रजातियों के बीजों के संरक्षित करने के उद्देश्य से की गई थी। दस किसानों के समूह द्वारा संचालित यह बीज बैंक आज न केवल स्थानीय परिस्थितियों के अनुकूल बीजों का संरक्षण कर रहा है, बल्कि किसानों को बीज उपलब्ध कराने के साथ-साथ मोटे अनाजों का उत्पादन बढ़ाने और प्राकृतिक खेती को अपनाने के लिए प्रोत्साहित भी कर रहा है।

सामुदायिक बीज बैंक का संचालन करने वाले किसान समूह के अध्यक्ष पूरण लाल सैयाम ने बताया कि स्थापना के बाद के दो वर्ष बीज बैंक के लिए कठिनाइयों भरे थे। एक कच्चे मकान में स्थापित इस बैंक के लिए दूर-दूर से बीजों को लाने से बड़ी चुनौती उनका सुरक्षित संग्रहण थी। कई बार बीजों को चूहों द्वारा नष्ट कर दिये जाने की समस्या का सामना भी करना पड़ता था।

श्री सैयाम बताते हैं कि वर्ष 2014-15 में स्थापित इस बीज बैंक को आत्मा परियोजना से बड़ा सहारा मिला। आत्मा परियोजना द्वारा उपलब्ध कराये गये 50 हजार रूपये से बैंक द्वारा बीजों के भंडारण के लिए कंटेनर और अन्य सामग्री ली गई। इनमें कोदो-कुटकी, रागी, कंगनी, जगनी, सवा सहित विभिन्न पारंपरिक प्रजातियों के मोटे अनाजों के बीजों को संरक्षित किया जा रहा है। बैंक में कोदो की दो देशी प्रजातियों खुटिया एवं सायरा, कुटकी की लाल एवं काली किस्म, करधनी, झल्लार, देशी कंगनी, देशी जगनी, देशी सवा, लाल हरी भिंडी तथा देशी ज्वार, बाजरा एवं लौकी के बीज उपलब्ध हैं।

श्री सैयाम ने बताया कि समनापुर के साथ-साथ बासनपानी, धुवई, मोठार और बम्हनी जैसे आसपास के गांवों के 25 से 30 किसान प्रतिवर्ष इस बीज बैंक से बीज प्राप्त कर रहे हैं। बीज बैंक द्वारा कृषकों को बीज देकर उनसे डेढ़ गुना ज्यादा बीज वापस लिया जाता है। इससे बीज बैंक में बीजों का भंडारण लगातार बना रहता है तथा अन्य किसानों को भी बिना पैसे के अच्छे बीज आसानी से उपलब्ध कराये जा सकते हैं।

समनापुर में किसानों के समूह द्वारा स्थापित किये गए इस सामुदायिक बीज बैंक का मुख्यमंत्री जन विश्वास अभियान के तहत आत्मा परियोजना के अधिकारियों ने अवलोकन किया तथा यहाँ पारम्परिक एवं स्थानीय प्रजातियों के बीजों के संरक्षण एवं संवर्धन के संबंध में जानकारी ली।

इस अवसर पर परियोजना संचालक आत्मा डॉ इंदिरा त्रिपाठी ने स्थानीय किसानों की इस नवाचारी पहल की सराहना करते हुए बीजों के संरक्षण एवं संवर्धन को कृषि की स्थिरता और जैव विविधता के लिए महत्वपूर्ण बताया तथा वहां उपस्थित कृषकों को बीज बैंक से बीज लेने के लिए प्रेरित किया। डॉ त्रिपाठी ने मोटे अनाज के उत्पादन को बढ़ावा देने मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव द्वारा प्रारंभ की गई रानी दुर्गावती श्रीअन्न प्रोत्साहन योजना की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस योजना के अंतर्गत कोदो, कुटकी, रागी, ज्वार और बाजरा जैसे मोटे अनाज का उत्पादन करने वाले किसानों को एक हजार रूपये प्रति क्विंटल की आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है।