जल ही जीवन का आधार है और जल संरक्षण के सामूहिक प्रयास आने वाले समय के लिए बड़ी पूंजी हैं। इसी उद्देश्य से जिले में 19 मार्च से 30 जून 2026 तक जल गंगा संवर्धन अभियान संचालित किया गया। अभियान के दौरान मुख्यमंत्री सहित जनप्रतिनिधियों, अधिकारी-कर्मचारियों और ग्रामीण जनों की सक्रिय सहभागिता से जल संरक्षण एवं संवर्धन के कार्यों को व्यापक स्तर पर गति मिली।
अभियान के अंतर्गत जिले में 8,772 जल संरक्षण एवं संवर्धन कार्य पूर्ण किए गए। इन कार्यों के परिणामस्वरूप जिले में 55 लाख 96 हजार घन मीटर जल संरक्षण क्षमता में वृद्धि हुई है। जल संरक्षण के इन कार्यों से वर्षा जल को सहेजने और भूजल स्तर को बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण बदलाव आया है।
अभियान के माध्यम से शहर, गांव और कस्बों में स्थित जल स्रोतों के संरक्षण और संवर्धन पर विशेष ध्यान दिया गया। जहां बावड़ियां, तालाब, कुएं तथा अन्य जल संरचनाएं उपलब्ध थीं, वहां उनकी स्थिति में सुधार करते हुए साफ-सफाई, स्वच्छता, गहरीकरण एवं आवश्यक जीर्णोद्धार के कार्य किए गए। जल स्रोतों में जमा गाद एवं अन्य अवरोधों को हटाकर उनकी जल संग्रहण क्षमता बढ़ाने का प्रयास किया गया।
इससे पुराने और पारंपरिक जल स्रोतों को उपयोगी बनाने के साथ वर्षा जल के संरक्षण को भी बढ़ावा मिला। इस अभियान की सफलता केवल शासकीय प्रयासों का परिणाम नहीं, बल्कि जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक अमले और ग्रामीणों के साझा संकल्प का परिणाम है। मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में अधिकारी-कर्मचारियों ने योजनाबद्ध तरीके से कार्यों को गति दी, वहीं ग्रामीणों ने भी सहभागिता और सहयोग के माध्यम से इसे जनअभियान का स्वरूप दिया।
8,772 पूर्ण कार्य और 55.96 लाख घन मीटर बढ़ी जल संरक्षण क्षमता जिले में जल संरक्षण की दिशा में हुए बदलाव की कहानी बयां करती है। जल स्रोतों की साफ-सफाई, गहरीकरण, जीर्णोद्धार और संरक्षण से जिले में जल के प्रति जागरूकता बढ़ी है तथा भविष्य की जल सुरक्षा के लिए मजबूत आधार तैयार हुआ है।

